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NCERT Solutions for Class 9th History

 

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Chapter 5. आधुनिक विश्व में चरवाहे

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

 

 

 

5. आधुनिक विश्व में चरवाहे


प्रश्न : मासाई दसमुदाय के चारागाह उनसे क्यो छिन गए ?
उत्तर : मासाई चरवाहे अफ्रीका मे रहते है । मासाई चरवाहे मुख्य रूप से उतरी अफ्रीका मे रहते थे - 3000000 दक्षिण कीनीया मे तथा 150000 तनजानियामें, उपनिवेशी सरकार ने नये कानून बनाकर उनकी प्रभावित किया तथा यहाँ तक कि उन्हे अपने संबध फिर से बनाने पडे ।
कारणः
1. मासाई समुदाय से लगातर उनके चारागाह छिनते रहे । मासाई भूमि उतरी कीनिया से लेकर उतरी तनजानिया तक विस्तृत था । 19वी  शताब्दी के अंत मे यूरोपियन साम्राज्यवादी शक्तियो ने अफ्रीका मे उनकी भूमि पर अधिकार कर लिया ।
2. कीनिया में अंग्रेजों ने मसाई लोगों को दक्षिणी भागों में धकेल दिया जबकि जर्मन लोगो ने उन्हें उतरी तंजानिया की ओर धकेल दिया । इसप्रकार वे अपने ही घर में बेगानो जैसा हो गये थें।
3. सम्राज्यवादी देश की भांति अंग्रेजी और जर्मन भी बेकार परती भूमी को जिससे न कोई आय थी और न कर ही मिलती थी उन परती जमीनों को वहाँ के किसानो के बीच बाँट दी और मसाई लोग हाथ मलते रह गये ।

प्रश्न : किन कारणें से चारागाह भूमि में भारी कमी आई ।
उत्तर : निम्नलिखित कारणों से चारागाह भूमि में भारी कमी आई। 
1. बेकार परती भूमी जो चारागाहें थीं, जिससे न कोई आय थी और न कर ही मिलती थी उन परती जमीनों को वहाँ के किसानों के बीच बाँट दी। 
2. वनों में वन अधिकारीयों नें पशुओं के चराने पर रोक लगा दी । उनका मानना था कि  चराई से पौधों की जडें समाप्त हो जाती है। इस प्रकार चारागाहों में तेजी से कमी आई ।
प्रश्न : दो कारण बताइए जिससे कि 18 वीं सदी में इग्लैण्ड में बाडाबंदी आवश्यक हो गई ।
उत्तर -

(1)  भूमि पर लंबी अवधि के निवेश के कारण।
(2)  बाडाबंदी ने धनी किसानों को अपने नियंत्रण की भूमि को विकसित करने दिया ।

प्रश्न : गुज्जर बकरवाल कौन हैं ? उनके जीवन का वर्णन करो ।
उत्तर : गुज्जर बकरवाल जम्मु कश्मीर का एक चरवाहा समूदाय है जो भेड - बकरियों को बडे बडे रेवड़ रखते थे। इस समुदाय के अधिकतर लोग अपने मवेशियों लिए चारागाहों की तलाश में यहॉ आए थे। जाडों में जब ऊँची पहाडियाँ बर्फ से ढक जाती है तो निचली पहाडियों में आकर डेरा डाल देते है । गर्मीयों में ये अपने रेवड़ को लेकर ऊँची पहाडियों पर चले जाते थे ।
प्रश्न : गद्दी समुदाय कहाँ के चरवाहा समुदाय है ?
उत्तर : हिमांचल प्रदेश ।
प्रश्न : भाबर शब्द का अर्थ लिखिए ।
उत्तर : गढवाल और कुमाऊँ के इलाके में पहाडियों के नीचले हिस्से के आस पास पाए जाने वाले शुष्क या सूखे जंगल का इलाका को भाबर कहते हैं ।
प्रश्न : बुग्याल किसे कहते है ?
उत्तर : उच्ची पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित विस्तृत चरागाहों को बुग्याल कहते है। जैसे - पूर्वी गढवाल के बुग्याल जहॉ भेड चराये जाते है। 
प्रश्न : धंगर कहाँ कर चरवाहा समुदाय हैं ?
उत्तर : महाराष्ट्र का।
प्रश्न : धंगर समुदाय चरवाही के आलावा जीविका के लिए और कौन कौन से काम करते थे ?
उत्तर - धंगर समुदाय महाराष्ट्र का जाना माना चरवाहा समुदाय हैं । 
जीविका के लिए ये समुदाय निम्न काम करते थे। 
1. कम्बल और चादरें भी बनाते थे।
2. कुछ भैंस भी पालते थे। 
3. अक्टूबर के आसपास ये बाजरें की कटाई करते थे।
प्रश्न : भारत के कुछ चरवाहें समुदायों का नाम लिखिए।
उत्तर : 

जम्मु कश्मीर - गुज्जर बकरवाल ।
हिमांचल प्रदेश - गद्दी समुदाय    
महाराष्ट्र - धंगर
राजस्थान - राइका 
कर्नाटक और आध्र प्रदेश - गोल्ला , कुरूमा , और कुरूबा समुदाय।
उतर प्रदेश, मध्य प्रदेश - बंजारे।
प्रश्न : चलवासी चरवाहों के निरंतर प्रवास से पर्यावरण को क्या लाभ होता है ।
उत्तर : जहाँ इनके मवेशी चरते है वहॉ की भूमी उपजाऊ हो जाती है । इसलिए किसान अपने अपने खेतों में चरने देते है ताकि मवेशियों के गोबर से खेत भर जाये ।

प्रश्न : धार क्या होते हैं ?
उत्तर : ऊँचे पर्वतों में स्थित चरागाहों को धार कहा जाता है। 

प्रश्न : वनों के आधिन क्षेत्र बढाने की क्या आवश्यकता है ? कारण दों ।
उत्तर : भारत में वनों के आधीन क्षेत्रों वैज्ञानिक माँगों से काफी कम है। यह कुल भूमी क्षेत्र का 19.3 प्रतिशत है जबकि यह कुल भूमी क्षेत्र का 33 प्रतिशत होना चाहिए। अत: हमें  वनों के आधिन क्षेत्र बढाने की आवश्यकता है क्योंकि इसके मुख्य कारण निम्नलिखित है। 
1. पारिस्थ्तििक तंत्र को बनाये रखने के लिए हमें वनों के आधिन क्षेत्र बढाने की आवश्यकता है|
2. हवा का प्रदूषण कम करते है।
3. ग्लोबल वार्मिंग कम करने में वन हमारी सहायता करते हैं ये वायु से कार्बन डाई आक्साईड को शोषित करते है।
4. वन जीवों को प्राकृतिक निवास प्रदान करते है।
5. वनों का वर्षा लाने में बहुत बडा हाथ होता है। जल कणों को बर्षा की बूदों में परिवर्तित करते है।
6. वन मृदा का संरक्षण करते है और मृदा को पानी के साथ बहने से रोकते है।  
प्रश्न : भारत में वन क्षेत्र में भारी गिरावट में निम्नलिखित कारकों की भूमिका का वर्णन करें ।

1. रेलवें 
2. कृर्षि विस्तार 
3. व्यवसायिक खेती    
उत्तर - 
1. रेलवें के कारण वन-क्षेत्र पर प्रभाव - रेलों के निर्माण और पटरियों के बिछाने में प्रयोग आने वाले लकडी के स्लीपरों ने वन-क्षेत्र को घटाने में एक बडी भूमिका निभाई तथा वन-क्षेत्र काटकर रेल की पटरियां बिछाई गई। इंजन में भी लकडी की कोयला जलाई जाती थी । 
2. कृर्षि विस्तार के कारण वन-क्षेत्र पर प्रभाव - भारत की जनसंख्या बढती जा रही थी जिसके लिए कृर्षि -क्षेत्र का विस्तार करना आवश्यक था । फिर क्या था कृर्षि आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वनों की कटाई अंधाधुन्ध शुरू हो गई । देखते ही देखते ही वन समाप्त होते चले गए।
3. व्यवसायिक कृर्षि का वनों पर प्रभाव - अपने कारखानों को चलाने के लिए तथा अपनी बढती हुई जनसंख्या की भूख मिटाने के लिए ब्रिटिश सरकार ने स्वयं भारत में पटसन, गन्ना, गेहँू और कपास जैसी व्यवसायिक खेतीयो पर जोर दिया । इस प्रकार भारत के वनों का सफाया होना शुरू हो गया ।

प्रश्न : भारत के कुछ चरावाह - कबीलों के नाम लिखो। 
उत्तर : भारत के कुछ चरावाह - कबीलों के नाम
1.    जम्मू कश्मीर के गुज्जर बकरवाल
2.    हिमाचल प्रदेश के गद्दी गडरिये
3.    महाराष्ट्र के धंगर
4.    कर्नाटक में गोल्ला 
5.    आन्ध्र प्रदंश में कुरूमा और कुरबा        

प्रश्न : बंजारों के रहने सहने के ढंग का वर्णन करो ।
उत्तर : देश के एक बडे भाग विशेष कर पंजाब, राजस्थान, उतर प्रदेश, मध्यप्रदेश, और महाराष्ट्र आदि के ग्रमीण क्षंत्रों में पाई जाने वाली चरावहा टुकडों को बंजारा कहा जाता है। वे नई घास भूमियों की तलाश में अपने पशुओं के साथ दूर दूर तक घूमते रहते है। भोजन और पशु चारा के बदले में हल चलाने वाले पशुओं और दूध उत्पादों का लेन देन कर लेते है। साथ ही साथ इन पशुओं की खरीद ब्रिक्री भी करते रहते है। 
प्रश्न : स्पष्ट कीजिए कि घुमंतू समुदायों को बार बार एक जगह से दूसरे जगह क्यों जाना पडता है ? इस निरंतर आवागमन से पर्यावरण को क्या लाभ पहुँचता है ?
उत्तर : घुमंतू समुदायों को बार बार एक जगह से दूसरे जगह जाने के पीछे निम्नलिखित कारण है।
1. उनकी अपनी कोई चरागाह या खेत नही होता जिससे दूसरे के खेतो या दूर दूर के चारागाहों पर निर्भर रहना पडता है।
2. मौसम परिवर्तन के साथ साथ उन्हे अपने चरागाह भी बदलने पडते हैं जैसे पहाडों के उपरी भाग में बर्फ पडने पर वे पहाडी के निचले हिस्से में जाना पडता है। 
3. बर्फ पिघलते ही उनन्हे वापस ऊपर की पहाडों की ओर प्रस्थान करना पडता है। 
4. मैदानी भागों में इसी प्रकार बाढ़ आने पर वे ऊँचें स्थानों पर चले जाते है।


प्रश्न : उपनिवेशिक सरकार द्वारा बनाए गए वन अधिनियम कानुन से चरवाहों के जीवन पर क्या असर पडा ?
उत्तर : ब्रिटिश सरकार ने अनेक वन कानून पास कर चरवाहों का जीवन ही बदल दिया । आरक्षित तथा सूरक्षित वनों की श्रेणी के वनों में उनके घुसने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया क्योंकि पशु पौधे के नई कोपलों को खा जाते थे। इससें चरवाहों के लिए चारागाह का संकट उत्पन्न हो गया । 

प्रश्न : बताइए कि उपनिवेशिक सरकार द्वारा बनाए गए कानुनों से चरवाहों के जीवन पर क्या असर पडा ?
उत्तर : उपनिवेशिक सरकार द्वारा बनाए गए कानुनों से चरवाहों के जीवन पर निम्न असर पडा।
1. परती भूमी नियमावली - उपनिवेशिक सरकार द्वारा बनाए गए कानुन ‘परती भूमी नियमावली’ में चरागाह जो बंजर भूमि के समान थी ब्रिटिश सरकार ने कृर्षि योग्य बनाने के लिए गांव के मुखिया के सुपुर्द कर दिया जिससे चरागाहें समाप्त सी हो गई।
2. वन - अधिनियम - ब्रिटिश सरकार ने अनेक वन कानून पास कर चरवाहों का जीवन ही बदल दिया । आरक्षित तथा सूरक्षित वनों की श्रेणी के वनों में उनके घुसने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया क्योंकि पशु पौधे के नई कोपलों को खा जाते थे।
3. चराई कर - अपनी आय बढाने के लिए ब्रिटिश सरकार ने पशुओं पर भी कर लगा दिया । कर देने के पश्चात् इन्हें एक पास दिया जाता था । जिसको दिखाकर ही चरवाहे अपनी पशु चरा सकते थें । 1792 ई0 को हुई ।

 

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