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NCERT Solutions for Class 8th History

 

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Chapter 11. राष्ट्रीय आन्दोलन का संघटन

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

 

 

 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर 


प्रश्न 1: 1870 और 1880 के दशकों में बने राजनितिक संगठनों के नाम लिखिए |

उत्तर :

(i) पूना सार्वजानिक सभा,

(ii) इंडियन एसोसिएशन

(iii) मद्रास महाजन सभा

(iv) बोम्बे रेजीडेंसी एस्सोसिएशन

(v) भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस

प्रश्न 2: वर्नाकुलर प्रेस एक्ट क्या है ?

उत्तर : वर्नाकुलर प्रेस एक्ट ऐसा कानून था जिससे सरकार की आलोचना करने वालों को चुप कराया जा सके | इस कानून में प्रावधान था कि अगर किसी अख़बार में कोई "आपतिजनक" चीज छपती है तो सरकार उसकी प्रिटिंग प्रेस सहित सारी सम्पति जब्त कर सकती है ।

प्रश्न 3: इल्बर्ट बिल क्या है ? इसे अंगेरजी शासन ने वापस क्यों ले लिया ?

उत्तर : इल्बर्ट बिल अंग्रेजी शासन द्वारा लाया गया बिल था इस बिल में प्रावधान था कि भारतीय न्यायधीश भी ब्रिटिश या यूरोपीय व्यक्तियों पर मुकादम चला सकते हैं, ताकि भारत में काम करने वाले अंग्रेज और भारतीय न्यायधीशों के बीच समानता स्थापित किया जा सके ।  अंग्रेजों के भारी विरोध के बाद सरकार ने इसे वापस ले लिया ।

प्रश्न 4: शासन व्यवस्था के भारतीयकरण की माँग नस्लवाद के खिलाफ चल रहे आन्दोलन का एक हिस्सा थी कथन की पुष्टि कीजिए

उतर : (i) ज्यादातर महत्वपूर्ण नौकरियों पर गोर अफसरों का कब्ज़ा था ।

(ii) अंग्रेज आमतौर पर यह मानकर चलते थे कि भारतियों को जिम्मेदारी भरे पड़ नहीं दिए जा सकते ।

(iii) अंग्रेजी अफसर अपने वेतन का एक बड़ा हिस्सा ब्रिटेन भेज देते थे इसलिए लोगों को उम्मीद थी कि भारतीयकरण से यहाँ की धन सम्पति भी कुछ हद तक भारत में रुकने लगेगी |

(iv) भारतियों की माँग थी कि न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग किया जाय, आर्म्स एक्ट को निरस्त किया जाए और अभिव्यक्ति व बोलने की स्वतंत्रता दी जाए ।

प्रश्न 5: शुरूआती सालों में कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन के सामने कौन-कौन से आर्थिक मुद्दे उठाए ?

उत्तर : बढ़ते लगान के कारण काश्तकार और जमींदार विपन्न हो गए थे और अनाजों के भारी निर्यात के वजह से खाध्य पदार्थों का आभाव पैदा हो गया था । अत: इन शुरूआती सालों में कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन के सामने निम्नलिखित मुद्दे उठाए थे ।

(i) लगान कम किया जाए ।

(ii) फौजी खर्चों में कटौती की जाए ।

(iii) सिंचाई के लिए ज्यादा अनुदान दिया जाए ।

प्रश्न 6: मध्यमार्गी नेता जनता को ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण चरित्र से अवगत कराने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए ?

उत्तर : मध्यमार्गी नेताओं द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए गए :

(i) उन्होंने अखबार निकले, लेख लिखे और यह साबित करने का प्रयास किया की ब्रिटिश शासन देश को आर्थिक तबाही की ओर ले जा रही है ।

(ii) उन्होंने अपने भाषणों में ब्रिटिश शासन की निंदा की और जनमत निर्माण के लिए देश देश के विभिन्न भागों में अपने प्रतिनिधि भेजे ।

प्रश्न 7: अपने पहले बीस सालों में कांग्रेस अपने उद्देश्य और तरीकों के लिहाज से 'मध्यमार्गी' पार्टी थी इस कथन को स्पष्ट करने के लिए कांग्रेस के उन गतिविधियों का वर्णन कीजिए

उत्तर : शुरुआती वर्षों में कांग्रेस एक तरफ देश के सभी समुदायों के प्रतिनिधित्व का दावा भी करती थी और अन्रेजों के साथ मिलकर शासन भी करना चाहती थी । यह निम्नलिखित बातों से स्पष्ट हो जाता है ।

(i) कांग्रेस सरकार और शासन में भारतियों को और ज्यादा जगह दिए जाने के लिए आवाज उठाती रहती थी ।

(ii) कांग्रेस का आग्रह था कि विधान परिषदों में भारतियों को ज्यादा जगह दी जाए, परिषदों को ज्यादा अधिकार दिए जाएँ और जिन प्रान्तों में परिषदें नहीं हैं वहाँ उनका गठन किया जाएँ ।

(iii) कांग्रेस ने माँग की कि सिविल सेवा के लिए लंदन से साथ-साथ भारत में भी परीक्षा आयोजित की जाए ।

प्रश्न 8: मध्यमार्गी कौन थे ? वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ किस तरह का संघर्ष करना चाहते थे ?

उत्तर : कांग्रेस के वे नेता मध्यमार्गी कहलाते थे जो अपने उद्देश्यों और तरीकों से मध्यमार्गी थे, वे देश का प्रतिनिधित्व भी करना चाहते थे और सरकार में मिलकर शासन भी करना चाहते थे ।

मध्यमार्गी नेता ब्रिटिश शासन के खिलाफ निम्न प्रकार का संघर्ष करना चाहते थे -

(i)  वे जनता को ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण चरित्र से अवगत कराना चाहते थे ।

(ii)  उन्होंने इसे जनता तक पहुँचाने के लिए अख़बार निकला, लेख लिखे ।

(iii) उन्होंने अपने भाषणों में ब्रिटिश शासन की निंदा की और जनमत निर्माण के लिए देश देश के विभिन्न भागों में अपने प्रतिनिधि भेजे ।

प्रश्न 9: "स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं से लेकर रहूँगा" यह नारा किसने दिया था ?

उत्तर : बाल गंगाधर तिलक ने ।

प्रश्न : कांग्रेस के गरम दल के नेताओं के नाम लिखिए ।

उत्तर : (i) बाल गंगाधर तिलक (ii) विपिन चन्द्र पाल (iii) लाला लाजपत राय

प्रश्न 10: कांग्रेस के आमूल परिवर्तनवादी धड़े की राजनीती मध्यमार्गी धड़े की राजनीती से किस तरह भिन्न थी ?

उत्तर : कांग्रेस के आमूल परिवर्तनवादी धडा जिसे कांग्रेस के गरम दल भी कहा जाता है ये मध्यमार्गियों (नरमदल) से निम्न प्रकार से भिन्न थे ।

(i) मध्यमार्गी निवेदन की राजनीती करते थे जबकि आमूल परिवर्तनवादी धडा इसकी आलोचना करते थे ।

(ii) आमूल परिवर्तनवादी धडा आत्मनिर्भरता तथा रचनात्मक कामों के महत्त्व पर जोर देते थे, जबकि मध्यमार्गी अंग्रेजो की आलोचना तो करते थे परन्तु उनके साथ मिलकर काम भी करते थे ।

(iii) आमूल परिवर्तनवादी धडा स्वराज के लिए लड़ना चाहते थे जबकि मध्यमार्गी अंग्रेजी सरकार से अपने हक़ के लिए निवेदन करते थे या उनके सामने अपनी माँगों को रखते थे ।

प्रश्न 11: बंगाल विभाजन का विरोध करने के लिए कौन कौन से तरीके अपनाए गए ?

उत्तर : बंगाल विभाजन का विरोध करने के लिए निम्नलिखित तरीके अपनाए गए।

(i) विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार एव स्वदेशी बस्तुएँ अपनाना।

(ii) छात्रों ने सरकारी स्कूल और कॉलेजों का बहिष्कार किया ।

(iii) बंगाल विभाजन किये जाने के दिन को शोक दिवस के रूप में मनाया गया।

(iv) लोगों ने सरकारी नौकरियों एवं अदालतों का बहिष्कार किया ।

प्रश्न 12: अंग्रेजों द्वारा बंगाल विभाजन का क्या कारण था ?

उत्तर : अंग्रेजों द्वारा बंगाल विभाजन के निम्नलिखित कारण थे ।

(i) अंग्रेजी सरकार का मानना था कि प्रशासकीय सुधार के लिए बंगाल का विभाजन करना आवश्यक है । इस प्रशासकीय सुविधा का तात्पर्य अंग्रेज अफसर और व्यापारियों को मिलने वाले फायदों से था ।

(ii) वे बंगाल में बंगाली नेताओं के बढ़ते प्रभाव पर अंकुश लगाना चाहते थे इसलिए पूर्वी बंगाल को असम में मिला दिया ।

प्रश्न 13: लखनऊ समझौते की प्रमुख बातें क्या थी ?

उत्तर : लखनऊ समझौते में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच ऐतिहासिक दस्तखत हुए और दोनों संगठनों ने देश में प्रातिनिधिक सरकार के गठन के लिए मिलकर काम करने का फैसला हुआ ।

प्रश्न 14: स्वदेशी आन्दोलन से आप क्या समझते हैं ? इसका क्या उदेश्य था ?

उत्तर :  स्वदेशी आन्दोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण आन्दोलन था, यह एक सफल रणनीति एवं दर्शन था । स्वदेशी का अर्थ "अपने देश में बना" होता है । बंगाल विभाजन के समय यह आन्दोलन पुरे जोर पर था और इसे पुरे देश में चलाया गया था ।

स्वदेशी आन्दोलन के मुख्य उदेश्य :

(i) इसके तहत अपने देश में बने वस्तुओं का उपयोग करना और विदेश में बने वस्तुओं का पूर्ण बहिस्कार करना और ब्रिटिश साम्राज्यवादी ताकत को अधिक से अधिक आर्थिक नुकसान पहुँचाना ।

(ii) ब्रिटिश शासन का विरोध और स्वयं सहायता को बढ़ावा देना ।

(iii) इस आन्दोलन के दौरान स्वदेशी उद्यमों, राष्ट्रिय शिक्षा और भारतीय भाषाओँ के उपयोग को बढ़ावा दिया गया ।

प्रश्न 15: प्रथम विश्व युद्ध से लौटे सिपाही भारत में औपनिवेशिक शासन का विरोध क्यों करने लगे ?

उत्तर : उन्होंने ने ये अनुभव किया था कि कैसे साम्राज्यवादी शक्तियाँ एशिया और अफ्रीका में लोगों का शोषण कर रही थी यही कारण था कि प्रथम विश्व युद्ध से लौटे सिपाही भारत में औपनिवेशिक शासन का विरोध करने लगे ।

प्रश्न 16: भारतीय राष्ट्रवादियों को 1917 की रुसी क्रांति से कैसी प्रेरणा मिली ?

उत्तर : 1917 की रुसी क्रांति भारत ही नहीं अपितु विश्व के अधिकांश भागों को प्रभावित किया था । यह क्रांति किसानों और मजदूरों के संघर्ष की उस समय की प्रमुख घटना थी । इस घटना के बाद देश में समाजवादी विचार बड़े पैमाने पर फैलने लगे थे जिससे भारतीय राष्ट्रवादियों को नई प्रेरणा मिलने लगी ।

प्रश्न 17: भारतियों ने रोलेट कानून का विरोध क्यों किया ?

उत्तर : भारतियों का रोलेट कानून के विरोध के निम्नलिखित कारण था -

(i) अंग्रेजों द्वारा यह कानून लोगों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने के लिए लाया गया था ।

(ii) यह कानून लोगों के मुलभुत अधिकारों पर अंकुश लगाता था ।

(iii) लोगों के खिलाफ यह कानून पुलिस को और अधिक अधिकार देता था ।

प्रश्न 18: खिलाफत आन्दोलन क्यों चलाया गया ?

उत्तर : 1920 में विश्व युद्ध हारने के बाद तुर्की को युद्ध अपराधी मानते हुए अंग्रेजों ने तुर्की के सुल्तान (खलीफा) पर बहुत सख्त संधि थोप दी थी । क्योंकि प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की भी एक पक्ष था । इस घटना का भारतीय मुसलमानों में भारी गुस्सा था । भारतीय मुसलमान चाहते थे कि पुराने ऑटोमन साम्राज्य में स्थित पवित्र मुस्लिम स्थानों पर खलीफा का नियंत्रण बना रहना चाहिए ।

प्रश्न 19: सभी जगहों पर लोगों ने असहयोग आन्दोलन को अपने स्थानीय मुददों के साथ जोड़कर आगे बढाया । तीन उदाहरण देकर समझाइए ।

उत्तर : असहयोग आन्दोलन को लोगों ने अपने स्थानीय मुददों के साथ जोड़कर आगे बढाया यह कथन सत्य है, इसके निम्नलिखित उदाहरण हैं :

(i) खेडा, गुजरात में पाटीदार किसानों ने अंग्रेजों द्वारा थोप दिए गए भारी लगान के खिलाफ अहिंसक अभियान चलाया ।

(ii) तटीय आन्ध्र प्रदेश और तमिलनाडु के भीतरी भागों में शराब की दुकानों की घेराबंदी की गई ।

(iii) आन्ध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में आदिवासी और गरीब किसानों ने बहुत सारे "वन सत्याग्रह" किए ।

प्रश्न 20: गाँधी जी ने असहयोग आन्दोलन वापस क्यों ले लिया ?

उत्तर : महात्मा गाँधी हिंसक आन्दोलनों के विरुद्ध थे, फरवरी 1922 की चौरी-चौरा की घटना ने गाँधी जी को झकझोर के रख दिया । किसानों के शांतिपूर्ण जुलुस पर पुलिस वालों ने गोलियाँ चला दी जिससे किसान बेकाबू हो गए । इससे किसानों ने चौरी-चौरा पुलिस थाने पर हमला कर दिया और इसमें 22 पुलिस वाले मारे गए । इससे दुखी होकर गाँधी जी ने असहयोग आन्दोलन वापस ले लिया ।

प्रश्न 21: दांडी मार्च क्या है ? राष्ट्रिय आन्दोलन में इसकी भूमिका का वर्णन कीजिए ।

उत्तर : गांधीजी और उनके अनुयायियों ने साबरमती से 240 किलोमीटर दूर स्थित दांडी तट पर बिखरा नमक इक्कट्ठा करते हुए नमक कानून का सार्वजानिक रूप से उलंघन किया । गांधीजी के इसी यात्रा को इतिहास में दांडी मार्च के नाम से जाना जाता है ।

राष्ट्रिय आन्दोलन में दांडी मार्च भूमिका :

(i) इस यात्रा ने भारतीय समाज के सभी तरह के लोगों अमीर और गरीब सभी को राष्ट्रिय आन्दोलन से जोड़ा यात्रा ने भारतीय समाज के सभी तरह के लोगों अमीर और गरीब सभी को राष्ट्रिय आन्दोलन से जोड़ा ।

(ii) इस आन्दोलन के बाद अंग्रेजी शासन हिल गई और वह मानने लगी की भारत अब स्वतंत्र हुए बिना नहीं रह सकता ।

(iii) इस आन्दोलन में स्त्री-पुरुष ने बढ़ चढ़कर भाग लिया । बहुत से लोगों ने गाँधी जी के समर्थन में स्थानीय स्तर पर विरोध किया ।

प्रश्न 22: 1870 और 1880 के दशकों में लोग ब्रिटिश शासन से क्यों असंतुष्ट थे ?

उत्तर : 1870 और 1880 के दशकों में लोग ब्रिटिश शासन से असंतुष्ट होने के निम्नलिखित कारण थे : 
(i) 1887 में पास आर्म्स एक्ट जिसके जरिए भारतियों द्वारा अपने पास हथियार रखने का अधिकार छीन लिया गया । 
(ii) इसी दशक में वर्नाकुलर प्रेस एक्ट लाया गया जो प्रेस पर सेंसरशिप लगाने के लिए लाया गया था |
(iii) अंग्रेजी शासन द्वारा इल्बर्ट बिल जो अंग्रेजों और भारतीय न्यायधीशों के बीच समानता स्थापित करने के लिए लाया जाना था जिसे अंग्रेज लोगों के दबाव में वापस ले लिया गया था | 
(iv) इसके बाद बहुत से रानजीतिक संगठनों की स्थापना हुई जो अंगेजी नीतियों के विरोध में थी |  

 

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