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NCERT Solutions for Class 8th History

 

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Chapter 11. राष्ट्रीय आन्दोलन का संघटन

अभ्यास-प्रश्नोत्तर

 

 

 

अभ्यास-प्रश्नोत्तर : 


फिर से याद करें : 

प्रश्न 1: 1870 और 1880 के दशकों में लोग ब्रिटिश शासन से क्यों असंतुष्ट थे ?

उत्तर : 1870 और 1880 के दशकों में लोग ब्रिटिश शासन से असंतुष्ट होने के निम्नलिखित कारण थे : 
(i) 1887 में पास आर्म्स एक्ट जिसके जरिए भारतियों द्वारा अपने पास हथियार रखने का अधिकार छीन लिया गया । 
(ii) इसी दशक में वर्नाकुलर प्रेस एक्ट लाया गया जो प्रेस पर सेंसरशिप लगाने के लिए लाया गया था |
(iii) अंग्रेजी शासन द्वारा इल्बर्ट बिल जो अंग्रेजों और भारतीय न्यायधीशों के बीच समानता स्थापित करने के लिए लाया जाना था जिसे अंग्रेज लोगों के दबाव में वापस ले लिया गया था | 
(iv) इसके बाद बहुत से रानजीतिक संगठनों की स्थापना हुई जो अंगेजी नीतियों के विरोध में थी |  

प्रश्न 2: भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस किन लोगों के पक्ष में बोल रही थी ? 

उत्तर : भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस भारत के किसी एक वर्ग या समुदाय के पक्ष में नहीं बोल रही थी बल्कि सभी समुदायों के पक्ष में बोल रही थी | 

प्रश्न 3: पहले विश्व युद्ध से भारत पर कौन से आर्थिक असर पड़े ? 

उत्तर : पहले विश्व युद्ध से भारत पर निम्नलिखित आर्थिक असर पड़े - 

(i) इस युद्ध की वजह से ब्रिटिश भात सरकार के रक्षा व्यय में भारी इजाफा हुआ था |

(ii) इस खर्च को निकालने' की लिए सरकार ने निजी आय और व्यासायिक मुनाफे पर कर बढ़ा दिया था | 

(iii) सैनिक व्यय में इजाफे तथा युद्धक आपूर्ति की वजह से जरुरी कीमतों की चीजो में भारी उछाल आया और आम लोगो की जिन्दगी मुश्किल होती गई |

(iv) इस युद्ध में औद्योगिक वस्तुओ (जुत के बोरे, कपड़े, पटरियाँ) की माँग बढ़ा दी और अन्य देशो से भारत आने वाले आयात में कमी ला दी थी|

प्रश्न 4. 1940 के मुस्लिम लीग के प्रस्ताव में क्या माँग की गई थी ? 

उत्तर : 1940 में मुस्लिम लीग ने देश के पश्चिमोत्तर तथा पूर्वी क्षेत्रों में मुसलमानों के लिए "स्वतंत्र राज्यों" की माँग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया | इस प्रस्ताव में  विभाजन या पाकिस्तान का जिक्र नहीं था | वे मुस्लिमों के लिए एक स्वायत व्यवस्था की माँग कर रहे थे | 

आइए विचार करें : 

प्रश्न 5: मध्यमार्गी कौन थे ? वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ किस तरह का संघर्ष करना चाहते थे ?

उत्तर : कांग्रेस के वे नेता मध्यमार्गी कहलाते थे जो अपने उद्देश्यों और तरीकों से मध्यमार्गी थे, वे देश का प्रतिनिधित्व भी करना चाहते थे और सरकार में मिलकर शासन भी करना चाहते थे ।

मध्यमार्गी नेता ब्रिटिश शासन के खिलाफ निम्न प्रकार का संघर्ष करना चाहते थे -

(i)  वे जनता को ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण चरित्र से अवगत कराना चाहते थे ।

(ii)  उन्होंने इसे जनता तक पहुँचाने के लिए अख़बार निकला, लेख लिखे ।

(iii) उन्होंने अपने भाषणों में ब्रिटिश शासन की निंदा की और जनमत निर्माण के लिए देश देश के विभिन्न भागों में अपने प्रतिनिधि भेजे ।

प्रश्न 6: कांग्रेस के आमूल परिवर्तनवादी धड़े की राजनीती मध्यमार्गी धड़े की राजनीती से किस तरह भिन्न थी ?

उत्तर : कांग्रेस के आमूल परिवर्तनवादी धडा जिसे कांग्रेस के गरम दल भी कहा जाता है ये मध्यमार्गियों (नरमदल) से निम्न प्रकार से भिन्न थे ।

(i) मध्यमार्गी निवेदन की राजनीती करते थे जबकि आमूल परिवर्तनवादी धडा इसकी आलोचना करते थे ।

(ii) आमूल परिवर्तनवादी धडा आत्मनिर्भरता तथा रचनात्मक कामों के महत्त्व पर जोर देते थे, जबकि मध्यमार्गी अंग्रेजो की आलोचना तो करते थे परन्तु उनके साथ मिलकर काम भी करते थे ।

(iii) आमूल परिवर्तनवादी धडा स्वराज के लिए लड़ना चाहते थे जबकि मध्यमार्गी अंग्रेजी सरकार से अपने हक़ के लिए निवेदन करते थे या उनके सामने अपनी माँगों को रखते थे ।

प्रश्न 7: चर्चा करें कि भारत के विभिन्न भागों में असहयोग आन्दोलन ने किस-किस तरह के रूप ग्रहण किए ? लोग गाँधीजी के बारे में क्या समझते थे ? 

उत्तर : असहयोग आन्दोलन का भिन्न-भिन्न प्रदेशों में भिन्न-भिन्न रूप देखने को मिला - 

(i) खेडा, गुजरात में पाटीदार किसानों ने अंग्रेजों द्वारा थोप दिए गए भारी लगान के खिलाफ अहिंसक अभियान चलाया ।

(ii) तटीय आन्ध्र प्रदेश और तमिलनाडु के भीतरी भागों में शराब की दुकानों की घेराबंदी की गई ।

(iii) आन्ध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में आदिवासी और गरीब किसानों ने बहुत सारे "वन सत्याग्रह" किए ।

(iv) सिंध और बंगाल में भी खिलाफत-असहयोग के गठबंधन ने जबरदस्त सांप्रदायिक एकता को जन्म दिया | 

(v) पंजाब में सिखों के अकाली आन्दोलन भी असहयोग आन्दोलन से काफी घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ दिखाई दे रहा था | 

      गाँधी जी को लोग एक तरह का मसीहा, एक ऐसा व्यक्ति मानने लगे थे जो उन्हें मुसीबतों और गरीबी से छुटकारा दिला सकता है | असम में तो "गाँधी जी की जय" के नारे लगाते हुए चाय बगान मजदूरों में अपनी बागानों की नौकरी छोड़ दी | 

प्रश्न 8: गाँधीजी ने नमक कानून तोड़ने का फैसला क्यों लिया ?

उत्तर : उस समय नमक के उत्पादन और बिक्री पर सरकार का एकाधिकार था | नमक एक ऐसा वस्तु है जो देश के अमीर और गरीब समान रूप से उपयोग करते हैं | यह लोगों के आम जिंदगी से जुड़ा हुआ मुद्दा है | गांधीजी और अन्य राष्ट्रवादियों का मानना था कि नमक पर टैक्स वसूलना पाप है क्योंकि यह हमारे भोजन का बुनियादी हिस्सा होता है | गांधीजी को भरोसा था कि ऐसे मुद्दे के साथ देश का सभी तबका उनके आन्दोलन के साथ जुड़ जाएगा | यदि कारण है कि गांधीजी ने नमक कानून तोड़ने का फैसला लिया |  

प्रश्न 9: 1937-47 की उन घटनाओं पर चर्चा करें जिनके फलस्वरूप पाकिस्तान का जन्म हुआ ? 

उत्तर : 1937-47 की वे घटनाएँ जिनके फलस्वरूप पाकिस्तान का जन्म हुआ -

(i) 1930 के दशक के आखिरी सालों से मुस्लिम लीग मुसलमानों और हिन्दुओं को अलग-अलग "राष्ट्र" मानने लगी थी | 

(ii) बीस और तीस के दशकों के बीच कुछ हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच हुए तनाव भी इसका कारण था | 

(iii) 1937 के प्रांतीय चुनावों में मुस्लिम लीग की हार ने मुसलमान अल्पसंख्यक है यह सोंचने पर मजबूर कर दिया और उन्हें लगा की आगे भी लोकतान्त्रिक संरचना में गौण भूमिका निभानी पड़ेगी और मुसलमानों को भय था कि उन्हें प्रतिनिधित्व ही नहीं मिल पायेगा | 

(iv) 1937 में मुस्लिम लीग कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहती थी लेकिन कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया |

(v) 1945 में अंग्रेज, मुस्लिम लीग और कांग्रेस के बातचीत में, बहुत सारे मुसलमान कांग्रेस के साथ थे परन्तु मुस्लिम लीग खुद को भारतीय मुसलमानों का प्रतिनिधि मनवाना चाहती थी | कांग्रेस ने इस दावे को नामंजूर कर दिया | 

(vi) 1946 में दुबारा प्रांतीय चुनाव हुए कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा रहा और मुस्लिम लीग भी आरक्षित सीटों पर जीत हासिल की परन्तु "पाकिस्तान" की माँग पर वह चलती रही | 

(vii) 16 अगस्त 1946 को मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की माँग मनवाने के लिए "प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस" मानने का आह्वान किया और इसी दिन कलकाता में दंगा भड़क गई | 

 

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