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NCERT Solutions for Class 11th राजनितिक विज्ञान - II

 

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Chapter Chapter 5. अधिकार

अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

 

 

 

अतिरिक्त प्रश्नोत्तर :- 


Q1. अधिकार क्या है ? उदाहरण के द्वारा समझाये | 

उत्तर : अधिकार उन बातों का प्रतिक है, जिन्हें समाज के सभी लोगों के सम्मान और गरिमा का जीवन बसर करने के लिए महत्त्वपूर्ण और आवश्यक समझते हैं।

उदाहरण के लिए, आजीविका का अधिकार सम्मानजनक जीवन जीने के लिए ज़रूरी है। लाभकर रोजगार में नियोजित होना व्यक्ति को आर्थिक स्वतंत्रता देता है, इसीलिए यह उसकी गरिमा के लिए प्रमुख है। लाभकर रोशगार में नियोजित होना व्यक्ति को आर्थिक स्वतंत्रता देता है, इसीलिए यह उसकी गरिमा के लिए प्रमुख है। अपनी बुनियादी ज़रूरतों की पूर्ति हमें अपनी प्रतिभा और रुचियों की ओर प्रवृत्त होने की स्वतंत्रता प्रदान करती है|

अधिकार का अर्थ यह है कि मनुष्य के सामाजिक जीवन की वे परिस्थितिया है जिनके द्वारा मनुष्य अपना विकास कर सकता है तथा अधिकारों के बिना मनुष्य अपना विकास नहीं कर सकता है | जिस देश में नागरिकों को अधिकार प्राप्त नहीं होते , वहाँ के नागरिक अपना विकास नहीं कर सकते है | राज्य के द्वारा दिए गए अधिकारों को देखकर ही उस राज्य को अच्छा या बुरा कहा जा सकता है | 

लास्की के अनुसार

"अधिकार सामाजिक जीवन की वे परिस्थितियाँ है जिनके बिना साधारणत : कोई मनुष्य अपना विकास नहीं कर सकता |"

हालैंड के अनुसार,

"अधिकार एक व्यक्ति के द्वारा दुसरे व्यक्ति के कर्त्तव्यों को समाज के मन और शान्ति द्वारा प्रभावित करने की क्षमता है | "  

Q2. अधिकारों की दावेदारी से आप क्या समझाते है ? 

उत्तर : अधिकारों की दावेदारी से अभिप्राय यह है कि वे हमारी बेहतरी के लिए आवश्यक हैं। ये लोगों को उनकी दक्षता और प्रतिभा विकसित करने में सहयोग देते हैं।

उदाहरणार्थ, शिक्षा का अधिकार हमारी तर्क-शक्ति विकसित करने में मदद करता है, हमें उपयोगी कौशल प्रदान करता है और जीवन में सूझ-बूझ के साथ चयन करने में सक्षम बनाता है। व्यक्ति के कल्याण के लिए इस हद तक शिक्षा को अनिवार्य समझा जाता है कि उसे सार्वभौम अधिकार माना गया है।

Q3. नागरिक स्वतंत्रता का क्या अर्थ है? 

उत्तर : नागरिक स्वतंत्रता का अर्थ है- स्वतंत्रता और निष्पक्ष न्यायिक जाँच का अधिकार, विचारों की स्वतंत्रता अभिव्यक्ति का अधिकार, प्रतिवाद करने तथा असहमति प्रकट करने का अधिकार। नागरिक स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकार मिलकर किसी सरकार की लोकतांत्रिक प्रणाली की बुनियाद का निर्माण करते हैं। 

Q4. भारतीय संविधान में नागरिकों को कौन से मुलभुत अधिकार दिए गए है ? 

उत्तर : भारतीय संविधान में नागरिकों को निम्नलिखित मुलभुत अधिकार दिए गए है:-

(i) समानता का अधिकार

(ii) स्वतंत्रता का अधिकार

(iii) शोषण के विरुद्ध अधिकार

(iv) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

(v) शिक्षा और सांस्कृतिक का अधिकार

(vi) संवैधानिक उपचार का अधिकार  

Q5. मौलिक अधिकार से आप क्या समझते है?

उत्तर : मौलिक अधिकार वे अधिकार होते है जिनके बिना किसी देश के लोकतान्त्रिक व्यवस्था के नागरिक अपना विकास और उन्नति नहीं कर सकते है | जैसे - जीवन का अधिकार, समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शिक्षा व संस्कृति का अधिकार आदि | 

जिन कारणों से इसे मौलिक अधिकार कहा जाता है वे निम्न है :-

(i) ये अधिकार व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास लिए अति आवश्यक है |

(ii) ये अधिकार इसलिए भी मौलिक कहे जाते है क्योकि देश के संविधान में इनका उल्लेख कर दिया गया है और दिन - प्रति दिन बदलने वाली सरकारें अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए इनमे स्वेच्छा से परिवर्तन नहीं कर सकते है | 

(iii) ये अधिकार न्याय योग्य होते है |

Q6. अधिकार किस प्रकार राज्य को प्रभावित करते है ? 

उत्तर : अधिकार निम्न प्रकार से राज्य को प्रभावित करते है:- 

(i) राजनितिक एवं अन्य सभी प्रकार के अधिकार राज्य से प्राप्त किये जाने वाले मांग और दावे है इसलिए अधिकार मांग एवं दावों के रूप में राज्य की प्रभुता को सिमित करते है और रकते है |

(ii) अधिकार राज्य को किसी कार्य को करने या न करने की ओर निर्देश करते है |

(iii) अधिकार राज्य को कुछ करने या कुछ मांगे मनवाने के भी विवश करते है | 

(iv) अधिकार राज्य की लोगों के लिए सुधार करने या कार्य करने की प्रेरणा देते है |  

Q7. भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों के नाम बताइए | 

उत्तर : भारतीय संविधान में सात मौलिक अधिकार थे, परन्तु सन1979 में 44 वें संशोधन के द्वारा सम्पति के अधिकार को हटा दिया गया है अब छ : मौलिक अधिकार रह गए है जो निम्नलिखित है :- 

  1. समानता का अधिकार 
  2. स्वतंत्रता का अधिकार
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार
  4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
  5. शिक्षा और संस्कृति का अधिकार 
  6. संवैधानिक उपचार का अधिकार  

Q8. राजनितिक अधिकार से आप क्या समझाते है ? 

उत्तर : राजनीतिक अधिकार से अभिप्राय यह है कि राजनीतिक अधिकार नागरिकों को कानून के समक्ष बराबरी तथा राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदारी का हक देते हैं। इनमें वोट देने और प्रतिनिधि चुनने, चुनाव लड़ने, राजनीतिक पार्टियाँ बनाने या उनमें शामिल होने जैसे अधिकार शामिल हैं। राजनीतिक अधिकार नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े होते हैं। नागरिक स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकार मिलकर किसी सरकार की लोकतांत्रिक प्रणाली की बुनियाद का निर्माण करते हैं।

कुछ राजनितिक अधिकार निम्न प्रकार से है :- 

(i) कानून के समक्ष समानता 

(ii) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 

(iii) मतदान का अधिकार 

(iv) निर्वाचित होने का अधिकार 

(v) संघ बनाने का अधिकार 

(vi) प्रतिनिधि चुनने का अधिकार 

(vii) राजनैतिक दल बनाने का अधिकार 

Q9. जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट के अनुसार मानवीय गरिमा की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए | 

उत्तर : जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट के अनुसार लोगों के साथ गरिमामय बर्ताव करने का अर्थ था उनके साथ नैतिकता से पेश आना। 

18वीं सदी के जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट के लिए इस साधारण विचार का गहरा अर्थ था। उनके लिए इसका मतलब था कि हर मनुष्य की गरिमा है और मनुष्य होने के नाते उसके साथ इसी के अनुकुल बर्ताव किया जाना चाहिए। मनुष्य अशिक्षित हो सकता है, गरीब या शक्तिहीन हो सकता है। वह बेईमान अथवा अनैतिक भी हो सकता है। फिर भी वह एक मनुष्य है और वह प्रतिष्ठा पाने का हकदार है। 
कांट के विचार ने अधिकार की एक नैतिक अवधारणा प्रस्तुत की।

पहला, हमें दूसरों के साथ वैसा ही आचरण करना चाहिए, जैसा हम अपने लिए दूसरों से अपेक्षा करते हैं।

दूसरे, हमें यह निश्चित करना चाहिए कि हम दूसरों को अपनी स्वार्थ सिद्धि का साधन नहीं बनायेंगे। 

Q10. प्राकृतिक अधिकार से क्या अभिप्राय है ? 

उत्तर : 17वीं और 18 वीं शताब्दी में राजनीतिक सिद्धान्तकर तर्क देते थे कि हमारे लिए अधिकार प्रकृति या ईश्वर प्रदत्त हैं। हमें जन्म से वे अधिकार प्राप्त हैं।अत: कोई व्यक्ति या शासक उन्हें हमसे छीन नहीं सकता।

उन्होंने मनुष्य के लिए तीन प्राकृतिक अधिकार चिन्हित किये थे- (i) जीवन का अधिकार, (ii) स्वतंत्रता का अधिकार और (iii)  संपत्ति का अधिकार।

अन्य तमाम अधिकार इन बुनियादी अधिकारों से निकले हैं। हम इन अधिकारों का दावा करें या न करें, व्यक्ति होने के नाते हमें ये प्राप्त हैं। क्योंकि ये ईश्वर प्रदत्त है’ और उन्हें कोई मानव शासक या राज्य हमसे छीन नहीं सकता। प्राकृतिक अधिकारों के विचार का इस्तेमाल राज्यों अथवा सरकारों के द्वारा स्वेच्छाचारी शक्ति के प्रयोग का विरोध करने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए किया जाता था।

 

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