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NCERT Solutions for Class 11th राजनितिक विज्ञान - I

 

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Chapter Chapter 9. संविधान-एक जीवंत दस्तावेज

मुख्य बिन्दू

 

 

 

मुख्य बिन्दू :-  


  • किसी भी अच्छे संविधान में जीवंतता होना अनिवार्य है ताकि उसमें बदलते समय के अनुरूप बदलाव लाया जा सके।
  • भारतीय संविधान एक जीवंत दस्तावेज है। लागू होने के समय से यह अपने आप में बदलाव लाता रहा है।
  • भारतीय संविधान में मई 2013 तक 98 संशोधन हो चुके है।
  • संशोधनों के मामले में भारतीय संविधान लचीलेपन और कठोरता का सम्मिश्रण है।
  • भारतीय संविधान में संशोधन की प्रक्रिया अनुच्छेद 368 में दी गयी है। 
  • संविधान संशोधन की प्रक्रिया केवल संसद में ही प्रारंभ हो सकती है।
  •  संविधान संशोधन विधेयक के मामले मे राष्ट्रपति को पुनर्विचार के लिए विधेयक को संसद के पास भेजने का अधिकार नही है।
  •  सोवियत संघ में 74वर्षों के दौरान(1918, 1924, 1936 और 1977) संविधान चार बार बदला गया।
  •  भारतीय संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया।और इस संविधान को 26 जनवरी 1950 को औपचारिक रूप से लागू किया गया।
  •  लोकसभा में 545 सदस्य होते हैं। अतःकिसी भी संशोधन विधेयक का समर्थन करने के लिए 273 सदस्यों की आवश्यकता होती है।
  • यदि मतदान के समय 300 सदस्य मौजूद हों तो विधेयक पारित करने के लिए 273 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होगी।
  • 26 जनवरी, 2006 को हमारे संविधान को लागू हुए 56 वर्ष हो गए। दिसंबर, 2005 तक इसमें 92 संशोधन किए जा चुके थे।
  •  2001 से 2003 के बीच का समय गठबंधन की राजनीति का समय  माना जाता है।
  •  अनुच्छेद 74(1) में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि मंत्रिपरिषद् की सलाह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी होगी।
  • 52वाँ तथा 91वाँ संशोधन दल बदल विरोधी कानून के  अलावा इस काल में मताधिकार की आयु को 21 से 18 वर्ष करने के  लिए संविधान में संशोधन हुआ और 73वाँ और 74वाँ संशोधन भी किए गए।
  •  38वाँ, 39वाँ और 42वाँ संशोधन विशेष रूप से विवादास्पद रहे हैं।
  •  जून 1975 में देश में आपात्काल की घोषणा की गई।
  •  संविधान का 42वाँ संशोधन एक बड़ा संशोधन है। इसने संविधान को गहरे स्तर पर प्रभावित किया।
  •  38वें, 39वें तथा 42वें संशोधन के माध्यम से जो परिवर्तन किए गए थे उनमे से अधिकांश को 43वें, 44वें संशोधन के द्वारा निरस्त कर दिया।
  • सन् 2000 में भारत सरकार ने उच्चतम न्यायालय के सेवा निवृत्त मुख्य न्यायाधीश श्री वेंकटचलैया की अध्यक्षता में एक आयोग नियुक्त किया जिसका उद्देश्य संविधान के कामकाज की समीक्षा करना था।

 

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